क्या उत्तर प्रदेश के तालाब वास्तव में कब्जा मुक्त हो गए हैं?
एकता सेवा सोसाइटी ने उठाए गंभीर सवाल, सरकार की मंशा और अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न

क्या उत्तर प्रदेश के तालाब वास्तव में कब्जा मुक्त हो गए हैं?
एकता सेवा सोसाइटी ने उठाए गंभीर सवाल, सरकार कीमंशा और अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी तालाबों, पोखरों और जलाशयों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए समय-समय पर शासन द्वारा अभियान चलाए जाते रहे हैं। माननीय सर्वोच्च न्यायालय तथा विभिन्न न्यायालयों द्वारा भी सार्वजनिक जल स्रोतों को संरक्षित करने और अवैध कब्जों को हटाने के स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद प्रदेश के अनेक जनपदों में आज भी सरकारी तालाबों पर अवैध कब्जों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
एकता सेवा सोसाइटी उत्तर प्रदेश ने सवाल उठाया है कि यदि सरकार द्वारा तालाबों को कब्जा मुक्त कराने के निर्देश दिए जा चुके हैं, तो क्या वास्तव में प्रदेश के सभी तालाब अतिक्रमण मुक्त हो गए हैं? यदि नहीं, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा आदेशों का पूर्ण पालन क्यों नहीं कराया गया?
सोसाइटी का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की मंशा स्पष्ट रूप से अवैध कब्जों के विरुद्ध कार्रवाई करने और सार्वजनिक संपत्तियों को सुरक्षित रखने की रही है। सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का उद्देश्य भी भ्रष्टाचार, अवैध कब्जों और प्रशासनिक लापरवाही पर अंकुश लगाना है। लेकिन कई स्थानों पर जमीनी हकीकत सरकारी दावों से अलग दिखाई देती है।
एकता सेवा सोसाइटी ने आरोप लगाया कि अनेक क्षेत्रों में राजस्व अभिलेखों में दर्ज तालाबों पर आज भी निर्माण, व्यवसायिक गतिविधियां तथा अन्य प्रकार के अतिक्रमण जारी हैं। यदि यह सही है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
सोसाइटी ने मांग की है कि प्रदेशभर में सभी सरकारी तालाबों का पुनः सर्वे कराया जाए, अवैध कब्जों की सूची सार्वजनिक की जाए तथा कब्जा हटाने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध भी कठोर कार्रवाई की जाए।
संस्था का कहना है कि सरकार की नीतियां तभी सफल मानी जाएंगी जब उनका प्रभाव धरातल पर दिखाई दे। जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और भविष्य की पीढ़ियों के हित में तालाबों को कब्जा मुक्त कराना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
एकता सेवा सोसाइटी उत्तर प्रदेश ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप विशेष अभियान चलाकर सभी सरकारी तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए तथा दोषी अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए।




