10 वर्ष पुराने हाईकोर्ट के फैसले ने फिर बटोरी चर्चा, मीणा जाति को यूपी में एसटी लाभ देने से किया था इंकार
ब्यूरो रिपोर्ट

10 वर्ष पुराने हाईकोर्ट के फैसले ने फिर बटोरी चर्चा, मीणा जाति को यूपी में एसटी लाभ देने से किया था इंकार
प्रयागराज/बिजनौर। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा वर्ष 2014 में दिए गए एक महत्वपूर्ण निर्णय की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि राजस्थान में अनुसूचित जनजाति (एसटी) के रूप में मान्यता प्राप्त मीणा जाति को उत्तर प्रदेश में एसटी का लाभ नहीं दिया जा सकता, क्योंकि उत्तर प्रदेश की अधिसूचित अनुसूचित जनजाति सूची में मीणा जाति शामिल नहीं है।
वर्ष 2014 में दाखिल रिट याचिका संख्या 55655/2014 में याचिकाकर्ता ने स्वयं को मीणा जाति का बताते हुए अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की थी। मामले की सुनवाई के बाद 12 नवंबर 2014 को हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 341 और 342 के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की सूची राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित की जाती है तथा उसमें संशोधन का अधिकार केवल संसद को है। राज्य सरकारें या न्यायालय किसी जाति को सूची में शामिल या बाहर नहीं कर सकते।
कानूनी जानकारों का कहना है कि यह फैसला आज भी आरक्षण और जाति प्रमाण पत्र संबंधी मामलों में एक महत्वपूर्ण नजीर माना जाता है। निर्णय यह भी स्पष्ट करता है कि किसी राज्य में अनुसूचित जनजाति का लाभ प्राप्त करने वाली जाति को दूसरे राज्य में वही लाभ स्वतः प्राप्त नहीं हो सकता।




