अनुकम्पा नियुक्ति (Compassionate Appointment) से जुड़ा है, और इसमें एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि मृतक कर्मचारी के परिवार की आर्थिक स्थिति कैसी है।
अनुकम्पा नियुक्ति (Compassionate Appointment) से जुड़ा है, और इसमें एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि मृतक कर्मचारी के परिवार की आर्थिक स्थिति कैसी है।
📌 सामान्य नियम (उत्तर प्रदेश सहित अधिकांश राज्यों में)
अनुकम्पा नियुक्ति का उद्देश्य होता है: 👉 मृतक सरकारी कर्मचारी के परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता देना, ताकि परिवार भरण-पोषण कर सके।
इसलिए कुछ मुख्य शर्तें होती हैं:
❌ कब अनुकम्पा नियुक्ति नहीं मिलती:
यदि परिवार में पहले से कोई सदस्य सरकारी नौकरी में है
और उसकी आय से परिवार का भरण-पोषण संभव है
✅ आपके केस में स्थिति:
मृतक अध्यापक का पुत्र अनुकम्पा के लिए आवेदन करता है
लेकिन पुत्र की पत्नी (बहू) पहले से सरकारी अध्यापक है
👉 ऐसे में सामान्यतः: ➡️ अनुकम्पा नियुक्ति नहीं दी जाती, क्योंकि परिवार पहले से ही एक स्थायी सरकारी आय पर निर्भर है
➡️ विभाग यह मानता है कि परिवार आर्थिक संकट में नहीं है
⚖️ लेकिन अपवाद (Exception) भी हो सकते हैं:
कुछ विशेष परिस्थितियों में विचार किया जा सकता है, जैसे:
परिवार में आय बहुत कम हो
आश्रितों की संख्या अधिक हो
पत्नी अलग रह रही हो या परिवार का भरण-पोषण नहीं कर रही हो
कोई विशेष मानवीय परिस्थिति हो
👉 ऐसे मामलों में निर्णय जिलाधिकारी / विभाग / शासन स्तर पर केस-टू-केस आधार पर लिया जाता है।
📚 कानूनी स्थिति:
कई मामलों में हाई कोर्ट ने भी यही कहा है कि: 👉 अनुकम्पा नियुक्ति अधिकार (Right) नहीं बल्कि सुविधा (Concession) है
👉 यह केवल वास्तविक आर्थिक संकट में ही दी जानी चाहिए
✔️ निष्कर्ष:
👉 यदि मृतक अध्यापक के परिवार में बहू पहले से सरकारी नौकरी में है,
तो सामान्य परिस्थितियों में पुत्र को अनुकम्पा नियुक्ति नहीं मिलेगी।


