खेल मैदान पर कब्जा बना प्रशासन के लिए चुनौती!
बेदखली आदेश के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, हिंदू राष्ट्र सेना ने जिलाधिकारी से कहा— अब और देरी बर्दाश्त नहीं

खेल मैदान पर कब्जा बना प्रशासन के लिए चुनौती!
बेदखली आदेश के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, हिंदू राष्ट्र सेना ने जिलाधिकारी से कहा— अब और देरी बर्दाश्त नहीं
बिजनौर। तहसील चांदपुर के ग्राम पथरावरी में ग्रामसभा के खेल मैदान पर कथित अवैध कब्जे का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। राजस्व न्यायालय द्वारा बेदखली का आदेश पारित होने तथा न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद भूमि कब्जामुक्त न होने पर हिंदू राष्ट्र सेना ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
संगठन का आरोप है कि खसरा संख्या 109, रकबा 0.2020 हेक्टेयर, जो राजस्व अभिलेखों में खेल मैदान के रूप में दर्ज है, आज भी कथित रूप से अवैध कब्जे की चपेट में है। संगठन का कहना है कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 के अंतर्गत बेदखली आदेश पारित होने के बाद भी उसका पालन नहीं कराया गया, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।
हिंदू राष्ट्र सेना के जिला अध्यक्ष रविन्द्र कुमार ने कहा कि यह केवल जमीन का मामला नहीं, बल्कि गांव के बच्चों के भविष्य और उनके खेल के अधिकार का प्रश्न है। यदि खेल मैदान ही कब्जे में रहेगा तो आने वाली पीढ़ियां खेल और शारीरिक विकास के अवसरों से वंचित हो जाएंगी।
ज्ञापन में संगठन ने मांग की है कि खेल मैदान से तत्काल कथित अवैध कब्जा हटाया जाए, बेदखली आदेश का तत्काल पालन कराया जाए, भूमि को ग्रामसभा को सौंपकर स्थायी रूप से खेल मैदान के रूप में सुरक्षित किया जाए तथा यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि न्यायालय और राजस्व विभाग के आदेश भी धरातल पर लागू नहीं होंगे तो आम जनता का कानून और प्रशासन पर विश्वास कमजोर होगा। उनका कहना है कि ग्रामसभा की सार्वजनिक भूमि की रक्षा करना प्रशासन की संवैधानिक और कानूनी जिम्मेदारी है।
फिलहाल जिला प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि प्रशासनिक जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
अब पूरे जिले की निगाहें जिलाधिकारी के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि शिकायत सही पाई जाती है और खेल मैदान कब्जामुक्त कराया जाता है, तो यह न केवल सरकारी आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन का उदाहरण होगा, बल्कि ग्रामीण बच्चों के अधिकारों और ग्रामसभा की सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।



