बिजनौर में भ्रष्टाचार पर जनाक्रोश, जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर उठे सवाल

बिजनौर में भ्रष्टाचार पर जनाक्रोश, जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर उठे सवाल
जनपद बिजनौर में बढ़ते भ्रष्टाचार को लेकर अब आम जनता के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गों में भी आक्रोश तेजी से बढ़ता जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि ऐसे गंभीर मुद्दे पर जनपद के विधायक, सांसद और कई बड़े राजनीतिक चेहरे अब तक खुलकर सामने नहीं आए हैं, जिससे उनकी भूमिका पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि पंचायत, राजस्व, शिक्षा और स्वास्थ्य विभागों में भ्रष्टाचार ने जड़ें जमा ली हैं। लेकिन जनप्रतिनिधियों की चुप्पी से जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। लोगों का कहना है कि जिन जनप्रतिनिधियों को जनता ने अपनी आवाज उठाने के लिए चुना, वही आज इस मुद्दे पर मौन हैं।
वहीं, कई समाजसेवी, सामाजिक संगठन और जागरूक नागरिक अब खुलकर सामने आने लगे हैं। उनका कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे, तो समाज को आगे आकर इस लड़ाई को लड़ना होगा। विभिन्न संगठनों ने संयुक्त रूप से मांग की है कि बिजनौर में एक उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और हर विभाग की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की होगी।
निष्कर्ष:
बिजनौर में भ्रष्टाचार अब केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है। ऐसे में शासन, प्रशासन, जनप्रतिनिधि और समाज के हर वर्ग को एकजुट होकर इस समस्या का समाधान निकालना होगा, वरना जनता का भरोसा पूरी तरह टूट सकता है।




