फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र से सरकारी सिस्टम को धोखा! बिजनौर में प्राचार्य गायब, अब खुला संगठित षड्यंत्र का मामला
रिपोर्ट हाजी मो कासिम बिजनौर
फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र से सरकारी सिस्टम को धोखा! बिजनौर में प्राचार्य गायब, अब खुला संगठित षड्यंत्र का मामला
बिजनौर। जनपद के बेसिक शिक्षा विभाग में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने शासन-प्रशासन, पुलिस विभाग और आम जनता को झकझोर कर रख दिया है। विकासखंड कोतवाली क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय त्रिलोका वाला में तैनात रहे प्राचार्य प्रवीण कुमार वर्ष 2021–22 में अचानक संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो जाते हैं। इसके बाद विभाग को डाक और व्हाट्सएप के माध्यम से उनका कथित मृत्यु प्रमाणपत्र भेजकर पूरे सिस्टम को गुमराह कर दिया जाता है।
मामले ने तब गंभीर मोड़ लिया, जब सामाजिक कार्यकर्ता ऋषि ने इस कथित मृत्यु प्रमाणपत्र की सत्यता पर सवाल उठाए। आरटीआई के माध्यम से हुई जांच में जो सच्चाई सामने आई, वह प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। जनपद अमरोहा की तहसील नौगांवा के ग्राम लतीफपुर से मिली आधिकारिक आख्या में स्पष्ट किया गया कि प्रस्तुत मृत्यु प्रमाणपत्र पूरी तरह फर्जी, मनगढ़ंत और धोखाधड़ीपूर्ण है। यहां तक कि संबंधित नाम का कोई व्यक्ति उस ग्राम में निवासरत ही नहीं पाया गया।
यह मामला अब केवल एक व्यक्ति के गायब होने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें सरकारी अभिलेखों की जालसाजी, शासन को धोखा देने, वेतन या सरकारी धन के संभावित गबन और विभागीय मिलीभगत जैसे गंभीर आरोप जुड़ गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर फर्जी दस्तावेज किसके संरक्षण में तैयार किए गए? किन अधिकारियों और कर्मचारियों ने बिना सत्यापन ऐसे प्रमाणपत्रों को स्वीकार किया? क्या विभाग के भीतर ही किसी संगठित गिरोह ने इस पूरे षड्यंत्र को अंजाम दिया?
एकता सेवा सोसाइटी ने उठाई सख्त मांगें
इस पूरे मामले को लेकर एकता सेवा सोसाइटी ने कड़ा रुख अपनाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। सोसाइटी ने कहा है कि
पूरे प्रकरण की एसआईटी या मंडल स्तर पर स्वतंत्र जांच कराई जाए
प्राचार्य प्रवीण कुमार सहित सभी संदिग्धों पर IPC की धारा 420, 467, 468, 471 के तहत एफआईआर दर्ज की जाए
संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल निलंबित कर जांच से अलग किया जाए
यदि किसी प्रकार का वित्तीय लाभ लिया गया है तो उसकी वसूली कर संपत्ति की जांच कराई जाए
पूरे मामले को सार्वजनिक किया जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे
जनआंदोलन की चेतावनी
सोसाइटी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला मुख्यमंत्री, लोकायुक्त और न्यायालय तक ले जाया जाएगा तथा व्यापक जनआंदोलन छेड़ा जाएगा।
यह मामला अब सिर्फ एक शिक्षक के लापता होने का नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और कानून व्यवस्था की परीक्षा बन गया है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह प्रकरण शासन की छवि पर गहरा असर डाल सकता है।
अब देखना यह है कि शासन और प्रशासन इस गंभीर षड्यंत्र पर कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करता है।




