बिजनौर में बड़ा घोटाला! फर्जी प्रमाणपत्र से पदोन्नति का मामला उजागर 🚨
रिपोर्ट हाजी मो कासिम बिजनौर

🚨 बिजनौर में बड़ा घोटाला! फर्जी प्रमाणपत्र से पदोन्नति का मामला उजागर 🚨
📍 बिजनौर/नजीबाबाद
जनपद बिजनौर के नजीबाबाद क्षेत्र में उत्तर प्रदेश वन निगम से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक कर्मचारी पर फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्रों के आधार पर पदोन्नति प्राप्त करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
प्राप्त जानकारी एवं उपलब्ध दस्तावेजों (पत्रांक 74, दिनांक 23.04.2026) के अनुसार, विजेंद्र सिंह, जो वर्तमान में चौकीदार पद पर तैनात हैं, ने कथित रूप से फर्जी हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट प्रमाणपत्रों का उपयोग कर विभाग में पदोन्नति हासिल की।
सूत्रों के अनुसार विभागीय जांच में ये प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। हालांकि, इस गंभीर मामले में अब तक केवल पदावनति (Revert) की कार्रवाई की गई है, जबकि न तो कोई एफआईआर दर्ज हुई और न ही किसी प्रकार की आपराधिक कार्रवाई सामने आई है।
🔎 गंभीर आरोप क्या हैं?
– फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर पदोन्नति
– अवैध रूप से धन वसूली के आरोप
– अवैध लकड़ी परिवहन से जुड़े संदेह
– विभाग को संभावित राजस्व हानि
बताया जा रहा है कि जिन अधिकारियों ने उक्त कर्मचारी को प्रमोशन दिया या जांच में ढिलाई बरती, उनकी भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
⚖️ विशेषज्ञों की राय:
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर सरकारी लाभ लिया गया है, तो यह भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दंडनीय अपराध हो सकता है।

📢 संगठन की मांग:
“एकता सेवा सोसाइटी, उत्तर प्रदेश” ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि—
– विजिलेंस/ACB जांच कराई जाए
– दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज हो
– फर्जी तरीके से प्राप्त वेतन की वसूली हो
– संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो

🗣️ प्रशासन पर उठे सवाल:
यह मामला केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं, बल्कि विभागीय प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
👉 अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होती है या नहीं।




