उत्तर प्रदेश

तालाब और बंजर भूमि पर 26 अवैध दुकानें: धारा 67 की कार्रवाई के बाद भी नहीं हुई सीलिंग, प्रशासन पर उठे सवाल

ब्यूरो रिपोर्ट बिजनौर

तालाब और बंजर भूमि पर 26 अवैध दुकानें: धारा 67 की कार्रवाई के बाद भी नहीं हुई सीलिंग, प्रशासन पर उठे सवाल

मुख्यमंत्री पोर्टल शिकायत से खुलासा, कार्रवाई अधूरी—भीषण लापरवाही या सिस्टम की सुस्ती?

कोतवाली देहात । जनपद बिजनौर की तहसील नगीना अंतर्गत ग्राम पंचायत कोतवाली में ग्राम समाज की भूमि पर अवैध कब्जों का गंभीर मामला सामने आया है। एकता सेवा समिति द्वारा मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज कराई गई शिकायत के बाद राजस्व विभाग की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है।

 

जांच आख्या के अनुसार, गाटा संख्या 115 (0.038 हेक्टेयर) राजस्व अभिलेखों में तालाब (जलमग्न भूमि) के रूप में तथा गाटा संख्या 116 (0.025 हेक्टेयर) बंजर भूमि के रूप में दर्ज है। मौके पर सीमांकन के दौरान पाया गया कि तालाब की भूमि पर 15 और बंजर भूमि पर 11 दुकानों के रूप में कुल 26 अवैध निर्माण खड़े हैं।

 

राजस्व विभाग ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 67 के अंतर्गत संबंधित कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है, जिसकी पुष्टि तहसीलदार नगीना द्वारा की गई है।

 

हालांकि सबसे बड़ा सवाल यही है कि कार्रवाई के बावजूद अब तक इन अवैध दुकानों को न तो सील किया गया है और न ही हटाया गया है।

स्थानीय स्तर पर दुकानें पूर्ववत संचालित हो रही हैं, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

ग्रामीणों का कहना है कि यदि राजस्व अभिलेखों में स्पष्ट रूप से तालाब और बंजर भूमि दर्ज है, और जांच में अवैध कब्जा भी सिद्ध हो चुका है, तो फिर कार्रवाई अधूरी क्यों है? क्या प्रभावी लोगों का दबाव है या फिर प्रशासनिक उदासीनता?

 

यह मामला अब केवल अतिक्रमण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सरकारी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह बन गया है। मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बाद भी यदि जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी रहती है, तो आम जनता का भरोसा कैसे कायम रहेगा?

 

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि तत्काल प्रभाव से सभी अवैध दुकानों को सील कर अतिक्रमण हटाया जाए, साथ ही पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

 

अब देखना होगा कि प्रदेश सरकार और शीर्ष प्रशासन इस गंभीर मामले का संज्ञान लेकर क्या ठोस कदम उठाते हैं, या फिर यह प्रकरण भी कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा?

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