उत्तर प्रदेश

रोजगार सेवक की फर्म को लाखों का भुगतान

रिपोर्ट सौरभ कुमार

कोतवाली देहात। बिजनौर जिले के कोतवाली विकासखंड की एक ग्राम पंचायत में नियमों को ताक पर रखकर वित्तीय अनियमितता का बड़ा मामला सामने आया है। यहां शासकीय दायित्वों का निर्वहन करने वाले प्रशासक और सचिव ने आपसी मिलीभगत से ग्राम पंचायत के ही एक रोजगार सेवक की निजी फर्म को विभिन्न निर्माण कार्यों के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान कर दिया। सरकारी रिकॉर्ड और मेरी पंचायत पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों से इस पूरे मामले का खुलासा हुआ है।प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-2027 के अंतर्गत 22 अगस्त 2026 को एक ही दिन में बैक-टू-बैक तीन भुगतान आदेश (वाउचर) जारी किए गए। इन वाउचरों के माध्यम से कुल तीन लाख पैंसठ हजार छह सौ निन्यानवे रुपये की धनराशि एक ही ठेकेदार फर्म के बैंक खाते में हस्तांतरित की गई। जांच में सामने आया है कि यह बैंक खाता ग्राम पंचायत में तैनात रोजगार सेवक से संबंधित फर्म का है।पोर्टल के विवरण के मुताबिक, वाउचर संख्या 5THSFC/2026-27/P/6 के जरिए सी सी रोड व नाली निर्माण कार्य तथा टैक्स भुगतान के मद में 1,80,377 रुपये हस्तांतरित किए गए। इसी तरह वाउचर संख्या 5THSFC/2026-27/P/5 के माध्यम से सी सी वी नाली निर्माण कार्य के अंतिम भुगतान के रूप में 1,59,445 रुपये जारी किए गए। इसके अलावा तीसरे वाउचर संख्या 5THSFC/2026-27/P/7 के तहत आर सी वी स्लैब निर्माण कार्य और टैक्स के नाम पर 19,877 रुपये का भुगतान उसी खाते में भेजा गया।इस पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर बात यह है कि इन सभी भुगतानों को स्वीकृत करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर नियमों की अनदेखी की गई। नियमानुसार ई-भुगतान आदेश तैयार होने के बाद संबंधित सचिव ने डिजिटल सिग्नेचर (डीएससी) द्वारा इसे प्रस्तावित किया और तत्कालीन प्रशासक ने इस पर अपने डिजिटल हस्ताक्षर कर अंतिम स्वीकृति प्रदान की। इसके बाद पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) प्रक्रिया के माध्यम से यह धनराशि बैंक खाते में जमा करा दी गई।पंचायती राज नियमावली के तहत कोई भी पंचायत कर्मी या मानदेय प्राप्त कर्मचारी उसी ग्राम पंचायत में किसी भी प्रकार के व्यावसायिक टेंडर या निर्माण कार्य का प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से लाभ नहीं ले सकता। यह सीधे तौर पर हितों के टकराव और पद के दुरुपयोग का मामला है। इस वित्तीय गड़बड़ी के उजागर होने के बाद अब उच्चाधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले कार्मिकों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की जा रही है।

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