उत्तर प्रदेश

नगीना तहसील की ग्राम पंचायत कोतवाली में तालाबों पर अवैध निर्माण का आरोप, प्रशासन पर उठे सवाल..

रिपोर्ट हाजी मो. कासिम बिजनौर

नगीना तहसील की ग्राम पंचायत कोतवाली में तालाबों पर अवैध निर्माण का आरोप, प्रशासन पर उठे सवाल..

 

जनपद बिजनौर की तहसील नगीना अंतर्गत ग्राम पंचायत कोतवाली में सरकारी तालाबों पर कथित अवैध कब्जों और निर्माण का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि राजस्व अभिलेखों में दर्ज तालाबों की भूमि पर स्थायी निर्माण कर व्यावसायिक गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं, जिससे न केवल सरकारी संपत्ति पर अतिक्रमण हुआ है, बल्कि जल संरक्षण व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

 

विश्व हिंदू राष्ट्र सेना के जिला अध्यक्ष कौशिक त्यागी ने जिलाधिकारी को प्रेषित ज्ञापन में मांग की है कि पूरे प्रकरण की राजस्व विभाग से पैमाइश कराकर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए और जिन स्थानों पर अवैध कब्जे पाए जाएं, वहाँ तत्काल प्रभाव से हटाने की कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकारी भूमि पर व्यवसाय चलाया जा रहा है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

 

प्रशासनिक जिम्मेदारी पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से यह अवैध निर्माण जारी है, लेकिन अभी तक प्रभावी कार्रवाई न होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। ऐसे मामलों में:

 

जिलाधिकारी (DM) को समग्र निगरानी कर अतिक्रमण हटाने के निर्देश देने होते हैं।

 

उपजिलाधिकारी (SDM) नगीना व तहसीलदार को मौके की जांच, पैमाइश और कार्रवाई सुनिश्चित करनी होती है।

 

लेखपाल और कानूनगो को वास्तविक रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी होती है।

 

पुलिस प्रशासन को कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आवश्यक होने पर एफआईआर दर्ज करने की जिम्मेदारी होती है।

 

 

कानूनी प्रावधान जिनके तहत हो सकती है कार्रवाई:

 

उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 – सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने हेतु

 

आईपीसी की धारा 441/447 – आपराधिक अतिक्रमण

 

सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984 – सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर

 

 

संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र, निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो यह मुद्दा व्यापक जनआंदोलन का रूप ले सकता है। वहीं ग्रामीणों ने भी मांग की है कि तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कर मूल स्वरूप में बहाल किया जाए, ताकि पर्यावरण और जल संरक्षण की व्यवस्था सुरक्षित रह सके।

 

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

Director & chief

उत्तराखंड अभी तक न्यूज़ खबरें छुपता नहीं दिखता है। देशहित सर्वोपरि

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!