1.लकड़ी माफिया का तांडव: सड़क किनारे खड़े हरे पेड़ों पर रात में चल रहा कुल्हाड़ा, प्रशासन मौन
2.घर में घुसकर हिस्ट्रीशीटर का हमला: महिला को पीटा, पुलिस की निष्क्रियता पर उठे सवाल

1.🚨 लकड़ी माफिया का तांडव: सड़क किनारे खड़े हरे पेड़ों पर रात में चल रहा कुल्हाड़ा, प्रशासन मौन
कोतवाली देहात (बिजनौर):
थाना कोतवाली देहात क्षेत्र में नहटौर रोड पर लकड़ी माफियाओं का आतंक चरम पर पहुंच चुका है। सड़क किनारे खड़े हरे-भरे पेड़ों पर रात के अंधेरे में खुलेआम कुल्हाड़ी चलाई जा रही है। माफिया इतने बेखौफ हो चुके हैं कि उन्हें न तो कानून का डर है और न ही वन विभाग की कार्रवाई का कोई भय।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, मोटीन फैक्ट्री के सामने स्थित खेत में खड़े दो हरे-भरे शीशम के पेड़ों को बेरहमी से काट दिया गया। यही नहीं, क्षेत्र में आम, शीशम सहित कई प्रतिबंधित प्रजातियों के पेड़ों का लगातार अवैध कटान जारी है।
एक तरफ सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर हर साल वृक्षारोपण अभियान चला रही है, वहीं दूसरी तरफ लकड़ी माफिया खुलेआम पर्यावरण को नष्ट कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार सूचना देने के बावजूद वन विभाग और पुलिस कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे, जिससे माफियाओं के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।
👉 ग्रामीणों की मांग:
लकड़ी माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और रात में गश्त बढ़ाई जाए, ताकि पर्यावरण को बचाया जा सके।
2.🚨 घर में घुसकर हिस्ट्रीशीटर का हमला: महिला को पीटा, पुलिस की निष्क्रियता पर उठे सवाल
कोतवाली देहात (बिजनौर):
क्षेत्र में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। गांव करौंदा पच्दू निवासी सईदा पत्नी अनवर ने आरोप लगाया है कि गांव का हिस्ट्रीशीटर यूसुफ पुत्र सदीक अपने साथियों सलीम, गुलफाम, फैजान, अनीस व अन्य के साथ उसके घर में जबरन घुस आया।
आरोप है कि सभी आरोपी लाठी-डंडों और सरियों से लैस थे और घर में घुसते ही गाली-गलौज करते हुए हमला कर दिया। इस हमले में सईदा को गंभीर चोटें आईं।
पीड़िता ने तत्काल थाने में तहरीर दी, लेकिन 24 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे पीड़ित परिवार में भय और आक्रोश का माहौल है।
👉 बड़ा सवाल:
क्या हिस्ट्रीशीटरों को प्रशासन का संरक्षण मिल रहा है?
क्या आम नागरिक अब अपने ही घर में सुरक्षित नहीं?
👉 पीड़िता की मांग:
आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
⚠️ निष्कर्ष (एडिटोरियल टच)
क्षेत्र में लगातार बढ़ रही इन घटनाओं ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। चाहे पर्यावरण की लूट हो या कानून व्यवस्था की धज्जियां—दोनों मामलों में जिम्मेदार विभागों की चुप्पी जनता के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है।




