वन निगम में बड़ा खेल? फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी लेने का आरोप, शासन में मचा हड़कंप!
रिपोर्ट हाजी मो कासिम बिजनौर

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बिजनौर/नजीबाबाद/उत्तरप्रदेश
वन निगम में बड़ा खेल? फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी लेने का आरोप, शासन में मचा हड़कंप!
उत्तर प्रदेश वन निगम से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद विभागीय गलियारों में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि एक अधिकारी ने कथित रूप से संदिग्ध जाति प्रमाण पत्र और अपूर्ण अभिलेखों के सहारे वर्षों तक सरकारी सेवा और आरक्षण का लाभ उठाया। मामला उजागर होने के बाद अब शासन स्तर पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सूत्रों के मुताबिक विभागीय जांच में सेवा पुस्तिका, मूल दस्तावेजों और नियुक्ति प्रक्रिया में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि संबंधित अधिकारी के कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड विभागीय कार्यालयों में उपलब्ध ही नहीं मिले। इससे पूरे प्रकरण में बड़े स्तर की मिलीभगत और संरक्षण की आशंका जताई जा रही है।
जानकारों का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल एक अधिकारी का मामला नहीं बल्कि सरकारी व्यवस्था में वर्षों से चल रहे आरक्षण और नियुक्ति तंत्र के बड़े खेल का हिस्सा हो सकता है। चर्चा यह भी है कि कई जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले को दबाने में जुटे हुए हैं।
सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि मामले की जांच Vigilance, SIT या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, ताकि सच जनता के सामने आ सके। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि कार्रवाई में देरी हुई तो बड़े स्तर पर जनआंदोलन, मीडिया खुलासा और न्यायालय की शरण ली जाएगी।
जनता अब पूछ रही है—
❓ आखिर बिना मजबूत जांच के नियुक्तियां कैसे हुईं?
❓ विभागीय रिकॉर्ड गायब कैसे हुए?
❓ किसके संरक्षण में चलता रहा पूरा खेल?
❓ क्या अब भी दोषियों पर कार्रवाई होगी या मामला दबा दिया जाएगा?

फिलहाल पूरे मामले ने प्रशासनिक पारदर्शिता और सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



