उत्तर प्रदेश

बिजनौर शिक्षा विभाग बना लापरवाही का अड्डा! छात्र झुलसा, शिक्षक गायब, शिक्षिका विदेश में — आखिर बच्चों की जिंदगी से कब तक होगा खिलवाड़?

🟥📰 बिजनौर शिक्षा विभाग बना लापरवाही का अड्डा! छात्र झुलसा, शिक्षक गायब, शिक्षिका विदेश में — आखिर बच्चों की जिंदगी से कब तक होगा खिलवाड़?

 

 संवाददाता – उत्तराखंड अभी तक न्यूज़ 

बिजनौर / उत्तर प्रदेश

 

जनपद बिजनौर का शिक्षा विभाग अब शिक्षा का मंदिर कम और लापरवाही, भ्रष्टाचार और मनमानी का अड्डा ज्यादा दिखाई देने लगा है। एक मासूम छात्र के झुलसने की घटना ने पूरे जिले को हिलाकर रख दिया, लेकिन इससे भी बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिन शिक्षकों और अधिकारियों पर बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की जिम्मेदारी है, वे कर क्या रहे हैं?

 

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कहीं शिक्षक स्कूल से गायब मिले, तो कहीं शिक्षिका विदेश यात्रा पर बताई गईं। बच्चों को पढ़ाने के बजाय सरकारी नौकरी को मजाक बना देने वाले ऐसे कर्मचारियों ने पूरे शिक्षा विभाग की साख मिट्टी में मिला दी है। विभाग द्वारा तीन लोगों पर कार्रवाई की बात कही जा रही है, लेकिन जनता पूछ रही है कि क्या केवल कार्रवाई का दिखावा करके मामले को दबा दिया जाएगा?

 

ग्रामीण क्षेत्रों के अभिभावकों का कहना है कि बिजनौर के कई सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई भगवान भरोसे चल रही है। शिक्षक समय से स्कूल नहीं पहुंचते, कई जगह उपस्थिति केवल रजिस्टरों में दर्ज होती है और निरीक्षण के नाम पर खानापूर्ति का खेल चलता है। बच्चों के भविष्य के साथ खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी एसी कमरों से बाहर निकलने को तैयार नहीं।

 

सबसे शर्मनाक बात यह है कि एक छात्र झुलस गया और पूरे विभाग में मानो संवेदनहीनता छाई रही। यदि विद्यालयों में समय से निगरानी होती, सुरक्षा व्यवस्था होती और शिक्षक अपनी जिम्मेदारी निभाते, तो शायद यह घटना नहीं होती। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या सरकारी स्कूलों में गरीबों के बच्चों की जान की कोई कीमत नहीं बची?

 

जनता का आरोप है कि शिक्षा विभाग में वर्षों से “सिस्टम सेटिंग” का खेल चल रहा है। राजनीतिक संरक्षण और विभागीय सांठगांठ के चलते कई कर्मचारी बिना डर के मनमानी कर रहे हैं। जो शिक्षक स्कूल नहीं आते, उन पर कार्रवाई नहीं होती और जो अधिकारी निरीक्षण करने चाहिए, वे केवल कागजों में दौरे दिखाकर अपना दायित्व पूरा मान लेते हैं।

 

बिजनौर की जनता अब आर-पार की कार्रवाई चाहती है। लोगों की मांग है कि केवल शिक्षकों पर नहीं बल्कि संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों, जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों और पूरे मामले में लापरवाही बरतने वालों पर भी एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। क्योंकि जब तक बड़े अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक सरकारी शिक्षा व्यवस्था ऐसे ही बदहाल रहेगी।

 

आज सबसे बड़ा सवाल यही है —

क्या सरकारी स्कूल केवल वेतन लेने का केंद्र बन चुके हैं?

क्या गरीब बच्चों का भविष्य यूं ही भ्रष्ट व्यवस्था की भेंट चढ़ता रहेगा?

और आखिर बिजनौर शिक्षा विभाग में जवाबदेही तय कब होगी?

 

जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि कठोर कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार चाहती है।

Director & chief

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