UNCATEGORIZEDराजस्थान

जयपुर: `धर्म संकट` में फंसे मंत्री खाचरियावास, नगर निगम चुनाव में हुआ कुछ ऐसा…

ब्यूरो रिपोर्ट उत्तराखंड अभी तक न्यूज़ फ़ोन नंबर -9557903552

जयपुर। 

नगर निगम चुनावों को लेकर रण तैयार हो चुका है. दोनों पार्टियों ने जीताऊ उम्मीदवारों पर भरोसा जताते हुए टिकट वितरण किया है तो वहीं, टिकट वितरण से नाराज प्रत्याशियों ने निर्दलीय के रूप में ताल भी ठोक दी है. आने वाले 10 दिनों में इन प्रत्याशियों की मेहनत इनका भविष्य तय करेंगी. प्रत्याशियों ने अभी निर्दलीयों पर ही पार नहीं पाई थी कि इससे पहले रिश्ते मैदान में सामने खड़े हो गए हैं. राजधानी जयपुर के ग्रेटर से वार्ड नम्बर 39 से ऐसा समीकरण बना है.

दरअसल, निगम चुनाव की बिसात सज चुकी है और इस बार के निगम चुनावों ने प्रदेश के मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास को धर्म संकट में डाल दिया है. धर्म संकट ऐसा की जो राजनीति के रंग को दिखाता है. ग्रेटर के वार्ड 39 से कांग्रेस की टिकट से मंत्री के भाई हिम्मत सिंह चुनावी मैदान में हैं तो वहीं वार्ड 39 से ही बीजेपी के टिकट पर दामाद अजय सिंह चुनावी ताल ठोक चुके हैं. ऐसे में मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के सामने संकट है कि चुनावों में ‘भाई धर्म’ निभाए हैं या ‘ससुर धर्म’.

ग्रेटर से वार्ड नम्बर 39 से बीजेपी और कांग्रेस के प्रत्याशी आमने-सामने हैं. ये प्रत्याशी कोई धुर विरोधी नहीं बल्कि ससुर-जंवाई है. वार्ड 39 से कांग्रेस ने प्रदेश के मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के चाचा के बेटे हिम्मत सिंह खाचरिवास पर भरोसा जताते हुए टिकट दिया है. वहीं, बीजेपी ने इसी वार्ड से हिम्मत सिंह खाचरियावास की भतीजी के पति अजय सिंह चौहान को टिकट देकर दोनों को आमने सामने कर दिया है.

वहीं, दोनों ही प्रत्याशी सोमवार को नामांकन भरने पहुंचे. नामांकन दाखिल करने के बाद हिम्मत सिंह खाचरियावास ने कहा कि ‘ये चुनाव है और चुनाव में कोई रिश्तेदार नहीं होता. जो जनता की उम्मीदों पर खरा उतरता है वो ही जीत हासिल करता है. ऐसे में सामने कौन है इसकी चिंता छोड़ लोगों की समस्याओं पर ज्यादा ध्यान है. क्षेत्र में बहुत की समस्या है जो सालों से काबिज है और इन्हीं समस्याओं के निराकरण के वादों के साथ जनता के बीच में जाएंगे.

इधर, दामाद अजय सिंह चौहान ने नामांकन दाखिल करने के साथ ही मामा ससुर से जुहारी की भी मांग कर दी. अजय सिंह का कहना है कि ‘फिलहाल जनता की समस्याओं को लेकर जनता के बीच जाना लक्ष्य है. सामने कौन है इसकी चिंता नहीं है. हां, हिम्मत सिंह जी मेरे मामा ससुर है ऐसे में चुनाव में जुहारी की उम्मीद तो दामाद कर ही सकता है.’ हालांकि, निगम चुनाव में ऐसे हजारों रंग देखने को मिलेंगे. लेकिन अब मंत्री जी के सामने समस्या खड़ी हो गई है कि वो ‘भाई धर्म’ निभाए या ‘ससुर धर्म’.

Related Articles

error: Content is protected !!
Close