उत्तराखंडप्रधान संपादक ऋषि त्यागी

उत्तराखंड राज्य में अब हो सकती है 10 वर्ष की कैद और 25 हज़ार का जुर्माना …

ब्यूरो रिपोर्ट

 

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किसी मनुष्य को बहला फुसलाकर या फिर जबरन उसका धर्म परिवर्तन कराना मानवता के खिलाफ तो है ही अब कानून की नजर में भी यह एक बड़ा अपराध है जिसके खिलाफ अब उत्तराखंड सरकार ने भी कमर कस ली है।ऐसे लोगो के खिलाफ उत्तराखंड में अब बचाव का कोई रास्ता नही होगा।यदि किसी व्यक्ति के साथ असामाजिक तत्वों द्वारा इस तरह का कोई असामाजिक कार्य किया जाता है।तो उस दोष को कानून द्वारा अपराध की श्रेणी में रख अपराधी का जीवन सलाखों के पीछे पहुंच सकता है

 

तो आपको बता दे कि उत्तराखण्ड में अब सामूहिक धर्मांतरण कराने वालों को 25 हजार का जुर्माना ओर 10 साल तक कैद का प्रावधान करने की तैयारी की जा रही है। क्योंकि मौजूदा कानून में सामूहिक धर्मांतरण पर जुर्माने और सजा के प्रावधान की व्यवस्था नहीं है। इस संबंध में धार्मिक स्वतंत्रता कानून में संशोधन के लिए पुलिस मुख्यालय ने शासन को प्रस्ताव भेजा है। कई और धाराओं में बदलाव के लिए भी प्रस्ताव तैयार किया गया है।

 

पिछले दिनों उत्तराखंड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुलिस मुख्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इसमें उन्होंने उत्तराखंड धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम-2018 को कठोर बनाने की बात कही। इसके लिए उन्होंने पुलिस मुख्यालय से शासन को प्रस्ताव भेजने को कहा था। बता दें कि यह कानून पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के कानून से बेहद हल्का है। इसमें धर्मांतरण कराने वालों को महज तीन से पांच साल की सजा का प्रावधान है। यही नहीं मुकदमा दर्ज कराने के लिए भी पहले कोर्ट में वाद दायर करना होता है। इस तरह यदि मुकदमा हो भी जाता है तो आरोपी की गिरफ्तारी भी नियमानुसार संभव नहीं है।

 

कानून हल्का होने के कारण अंदेशा इस बात का भी है कि प्रदेश में जबरन धर्मांतरण के मामलों पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया जा सकता है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर अब पुलिस मुख्यालय ने इस कानून की विभिन्न धाराओं में संशोधन के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है। इसमें सामूहिक धर्मांतरण, नाबालिग का धर्मांतरण, अनुसूचित जाति, जनजाति की महिलाओं का धर्मांतरण, कोर्ट में विचारण आदि के संशोधन के लिए प्रस्ताव भेजे गए हैं।

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